आचार्य रमेश आर्य पिछले लगभग 15 वर्षों से वेद, संस्कृत, योग, ध्यान तथा भारतीय संस्कृति के अध्ययन, अध्यापन और वैदिक धर्म-प्रचार के कार्य में निरंतर समर्पित हैं। गुरुकुलीय परंपरा से प्राप्त ज्ञान और दीर्घ शिक्षण-अनुभव के आधार पर वे सरल, तर्कसंगत एवं व्यवहारिक शैली में वैदिक सिद्धांतों का प्रसार कर रहे हैं।
उनका जीवन-ध्येय है— वैदिक ज्ञान को सरल भाषा में जन-जन तक पहुँचाना, प्रत्येक व्यक्ति में आत्मिक जागृति उत्पन्न करना तथा नियमित साधना, शुद्ध मन्त्रोच्चारण, संस्कृत-अध्ययन, सदाचार और आदर्श चरित्र निर्माण के लिए प्रेरित करना।
वे ऑनलाइन एवं प्रत्यक्ष माध्यमों से वेद, संस्कृत, रामायण, सत्यार्थ प्रकाश, योग, ध्यान, बाल संस्कार तथा व्यक्तित्व निर्माण जैसे विषयों पर नियमित कक्षाएँ, सत्संग और व्याख्यान आयोजित करते हैं। उनका विश्वास है कि जब व्यक्ति का आत्मिक उत्थान होता है, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र का वास्तविक उत्थान संभव होता है।
संकल्प — “आत्मोन्नति से लोकमंगल की ओर।”